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Chhavi Srivastava

Tragedy

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Chhavi Srivastava

Tragedy

जेंटलमैन

जेंटलमैन

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मेरा एक मित्र बाहर जा रहा था ,

अमेरिकन डॉलर उसे बहुत लुभा रहा था।

मैंने उसे समझाया ,

इस देश ने है तुझे बनाया।

तू तो जा रहा है ,

बूढ़े माता पिता को किसके भरोसे छोड़े जा रहा है।

किन्तु वह तो ज़िद्द पर अड़ा था ,

अमेरिका जाने के लिए एक टांग पे खड़ा था।

देखना वहां मैं खूब डॉलर कमाऊंगा ,

जल्दी ही जेंटलमैन बन जाऊंगा।

मैं मित्र को समझा न पाया ,

और बुझे मन से हवाई अड्डे छोड़ आया।


कई वर्षों के बाद एक बड़ा सा पत्र आया ,

पूरे पत्र में उसके मैंने उसका व्यथा वृतांत ही पाया।

लिखा था डॉलर तो खूब कमाया ,

लेकिन सुकून नहीं पाया।

अपने माँ बाप के अंतिम दर्शन भी न कर पाया ,

अपने बेटे को भी अपने संस्कार नहीं दे पाया।

पत्नी दीपक न जला पाने की वजह से निराश रहती है,

क्यूंकि धुंआ होते ही फायर अलार्म की घंटी बज उठती है।

मित्र त्यौहार तो सभी मनाता हूँ,

लेकिन अपने मन को जकड़ा हुआ पाता हूँ।

अमेरिका में तो जेंटलमैन कहलाता हूँ ,

लेकिन अपनी नज़रों में खुद को आदिवासी ही पाता हूँ।


मन दुखी सा हो गया है ,

हास्य रस तो न जाने कहाँ खो गया है।

तेरी यहाँ आने से पहले कही हुई बातें याद आती है,

मेरे आँखों को नम कर जाती हैं।


अब सहन नहीं होता, मिथ्या ऐश्वर्य्स को अंतिम प्रणाम करता हूँ ,

शहीदों ने प्राण गवांकर जिस भारत को आज़ाद कराया उस मिटटी को आकर नमन करता हूँ।

अपने माता पिता को तो वापस न ला पाउँगा मैं ,

लेकिन अपने देश आकर अपने गांव का नाम पूरा विश्व में चमकाऊँगा मैं।

शायद इसी से मेरा पश्चाताप हो जाए ,

और मेरे मृत माता पिता को मुक्ति मिल जाए।


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