STORYMIRROR

Ms. Nikita

Classics Inspirational Others

4  

Ms. Nikita

Classics Inspirational Others

जाने कहाँ गए वो दिन

जाने कहाँ गए वो दिन

1 min
42

जाने कहाँ गए 

वो दिन

जब खेल-खेल में

रोते थे


पर न कोई किया

शिकवा-गिला

जाने कहाँ गए

वो दिन

जब सब ही 

अपने होते थे


न तेरा वो

न मेरा वो

सब एक ही

छत तले

सोते थे

जाने कहाँ गए


वो दिन

जब लगता

घाव मुझे और

दर्द उनको

होता था

सब हंसते थे

सब गाते थे


कोई और 

भी प्यार ही

करता था

जाने कहाँ गए

वो दिन

जब चाव 


हर समय 

होता था और

बादल भी

न रोता था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics