STORYMIRROR

Sachin Kumar

Classics Inspirational

4  

Sachin Kumar

Classics Inspirational

रिश्ता

रिश्ता

1 min
268

हमने रिश्तों के लिए धन लूटा बैठे 

जिंदगी की सारी कमाई हुई धन 

कुछ पल में गवा बैठे 

रिश्तों ने खूब रिश्ता निभाई

ना जाने रिश्तों ने कब रिश्ता गवा बैठेI

    

ये रिश्ता का मेल नहीं 

ये पैसो का खेल था 

टूटे रिश्तों का एक लम्हा बित गया 


उसने जहन में एक जख्म दे गया 

हमने इस जख्म पे मरहम लगाते–लगाते 

मैंने अपना उम्र खो गया !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics