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chandraprabha kumar

Action

4  

chandraprabha kumar

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जागरण

जागरण

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ऐ लड़की उठ !

समय की पन्नों पर

अपना नाम आग से लिख।

आग जलाती है,

कुंदन निखर कर जौहर दिखाता है,

ऑंखें चौंधिया जाती हैं। 


यश आकाश से नहीं टपकता

मनुष्य अपने श्रम से

अपने प्रयत्न से

उसे हासिल करता है,

हर संघर्ष के साथ 

एक संकट जुड़ा होता है। 


नारी जब जब नर से जुड़ी 

रही खड़ी वहीं वहीं 

बरसों युगों आदि समय से,

जब जब अलग हुई

चलने लगी पाने उद्‌गम 

अपनी इयत्ता की। 


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