इतनी जल्दी
इतनी जल्दी
कल रात तुम बिखर गए
मेरे साथ इतनी जल्दी,
मैंने रोका तुम्हे बहुत
पर तुम,
फिसल गए इतनी जल्दी
कितनी रातें काटी थी मैंने,
तेरे इंतजार में,
कल बना था समां इश्क का,
आधी रात में
तुम आके चले गए
क्यूँ इतनी जल्दी
माना कि आग में जल जाने का,
तुम्हे बहुत है शौक,
पर उस आग की गर्मी में ,
तुम खुद को ना पाए रोक,
कैसे छोड़ दिया मुझे बोलो
इतनी जल्दी
इश्क आराम से करने का,
दूसरा नाम है,
इसमे साँस भी चलती है जो,
वो बेजुबान है,
अधूरी प्यास को खींच के
कहाँ गए इतनी जल्दी
थोड़ा दम भरने की कोशिश से,
तुम मेरा अक्स भी ले जाते,
मैं कल रात तुम्हे वो सौंप देती,
जो तुम माँग पाते,
मगर तुम मचल गए
बिन कहे इतनी जल्दी
कल रात तुम बिखर गए
मेरे साथ इतनी जल्दी,
मैंने रोका तुम्हे बहुत
पर तुम,
फिसल गए इतनी जल्दी।
