इश्क़ आशिक़ी
इश्क़ आशिक़ी
इश्क़ आशिक़ी की किताबों में कुछ नहीं
क्या देख रहे हो मुझे हाथों में कुछ नहीं
कहकशाँ को पाने की तमन्ना लिए था मैं
कुछ और सोच सूखे गुलाबों में कुछ नहीं
जब तेरे पास प्यार के लिए जगहा नहीं हैं
तो छोड़ दे मुझे यार तू ख्वाबों में कुछ नहीं
जो बसाया था शहर प्यार का टूट गया वो
अब क्या ढूँढ रहे हो तुम दिलों में कुछ नहीं
वो तेरी आँखें वो तेरा सुरूर और वो शाम
चलो छोड़ो मुझे यार ख़यालों में कुछ नहीं।

