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Irfan Alauddin

Abstract Tragedy

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Irfan Alauddin

Abstract Tragedy

प्यार में सुख कभी नही मिलता

प्यार में सुख कभी नही मिलता

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प्यार में सुख कभी नहीं मिलता 

टूट जाओ हसीं नहीं मिलता


अपना अनुभव बता रहा हूँ मैं

यार अपना ख़ुदी नहीं मिलता


एक दम से ख़याल आया ये 

शाइरी  से  हनी नहीं मिलता


बे-ख़ुदी में लुटा न देना सब 

होश वालों रज़ी नहीं मिलता


या ख़ुदा मोजिज़ा दिखा अपना 

अब यहां पर सख़ी नहीं मिलता।


१.बे-ख़ुदी-अपने आप को भूल जाना 

अपने आप में रहना,बेसुधी,अचैतन्य

२.रज़ी:-पसंदीदा,ख़ुश करने वाला

3.सख़ी:-दान करने वाला

बड़े दिल वाला

४.मोजिज़ा:-चमत्कार


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