STORYMIRROR

Sonam Kewat

Romance

4  

Sonam Kewat

Romance

इश्क का मौसम

इश्क का मौसम

1 min
513

सोया हुआ था जो भौरा सदियों से

आज किसी के ख्वाब ने जगाया हैं

फिर खिल गई है मुरझाई कलियाँ

लगता हैं इश्क का मौसम आया है


गुनगुनाना तक भूल गया था जो

वो तो अब अक्सर गाने गाता है

चेहरे पर हमेशा उदासी रखने वाला

अब हर गम में भी मुस्कुराता है


महक रही हैं ये खुशबू हवाओं में

और हरियाली का मौसम छाया है

जो पत्ते बहा देते थे बौछारों को

उन पे ओंस के बूंदों का नशा छाया है


रात में छिप जाने वाले तारे भी

आजकल खूब ही टिमटिमाते हैं

मिलने के लिए इस मौसम से

वो टूटकर जमीन पे गिर जाते हैं


दूर दूर तक जाने वाले सारे पंछी

यहीं कहीं पेड़ों पर चहचहा रहे हैं

गुजारा था जिनका बस यहाँ वहाँ

वो भी अब घोसले बना रहे हैं


झूम रहे हैं सब मस्ती में देखो 

बड़े दिनों बाद ये पल आया है

गम को भूल बैठीं दिशाएं सारी

लगता है इश्क का मौसम आया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance