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Shireen Parween

Romance

4  

Shireen Parween

Romance

बेपनाह इश्क

बेपनाह इश्क

2 mins
300

अजीब सिलसिला था वह दोस्ती का साहिब 

जो कुछ दूर चला और इश्क़ में बदल गया 

सोचा न था कि इश्क होता है ऐसा भी 

पास होकर भी न हो सका पूरा और

 दूर जाकर भी न हो सका दूर

इश्क था बेपनाह मिली फिर भी सज़ा 

दासताँ है पुरानी पर याद रहेगी हमारी ॥

आज 25साल बाद, फिर से मन में वही धुन गूंजने लगी 

फिर से आँखों में वही चमक ,

फिर से होंठों में हल्की सी मुस्कान दिखने लगी, 

आज 25 साल बाद 

रास्ते के दूसरे मोड़ पर खड़ी थी वह शायद किसी की तलाश में ,

 नजरें मेरी उस पर जा अटकी, जैसे एक पल के लिए प्रकृति भी ठहर गयी हो 

बीते हुए दिन फिर से नजरों के सामने आ रही थी ,

प्यार था उस से जो आज एक बच्चे की माँ है ॥

दिन था वह 4.4.1997 का रास्ते के दूसरे मोड़ पर खड़ी थी 

दोनों थे अंजान, बस की तलाश में रहते थे दोनों 

दिन बीतता गया और दूरियां नजदीकी में बदलने लगी

दोस्त बने ,साथी बने पर समाज के नियमों ने दे दिये पहरे 

कर लिया उस ने बिना मरज़ी के शादी,

 रह गया मैं अकेला 

समाज के ठोकरों ने सिखाया लड़ना, 

उसका प्यार बना दिया कामयाब मुझे

सब कुछ था पास मेरे , बस मोहब्बत की थी कमी 

कभी न भूलूंगा मैं उस का यह उपकार 

जाते हुए भी बना गई मुझे कामयाब ॥

आज फिर 04.04.22 है, बीत गया 25साल 

रास्ते के दूसरे मोड़ पर खड़ी थी, देखते ही सहम गई वह

डरती थी कहीं कोई देख न ले,

साथ में थी उस की मासूम सी बच्ची ,

जो उसे पुकारती बार बार 

कह न पाये कुछ ,तेज़ रफ़्तार से धड़कन आवाज दे रही थी मेरी 

नज़रें तो आज भी उसे वैसे ही देखती है मेरी 

बेपनाह इश्क़ की थी यही दासताँ ,पर याद रहेगी हमारी ॥॥॥



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