STORYMIRROR

Shireen Parween

Children

4  

Shireen Parween

Children

हिन्दी की अभिलाषा

हिन्दी की अभिलाषा

1 min
252

राष्ट्र भाषा की बोली है न्यारी 

यह हमारी हिन्दी प्यारी 

आती है याद सिर्फ 14 सितम्बर को 

रख पाते हैं हम इसका कितना


ध्यान,हर पल हर दिन करते हम 

हिन्दी बोलनेवालों का अपमान,

कैसी यह दुर्दशा आ गई है 

जहाँ यह लाचारी से बच्चों को गुजरना पडता है 


काका कालेलकर, गुप्त जी,दिवेदी जी जैसे 

महान साहित्यकारोंं ने बढ़ाया इसको आगे, 

मिट्टी में मिला दिया हमनेे

इसकी कोशिशों,

को और बना दिया लाचार 


न ही यह एक स्पर्धा है

और न ही यह एक प्रतियोगिता 

लोगों को रुबरू कराना है इसका उद्देश्य 

जिससे इसकी अपनी पहचान बन पायेे 

देवनागरी हैै इसकी लिपि, 


सहज और मनमोहक है इसकी छवि 

बोली से करती वह मुग्ध, 

जो पढ़े, वह भी समझजाये

हिन्दी थी जन जन की भाषा,यही थी इसकी अभिलाषा 

हिन्दी दिवस का यह दिन बस


दिन न मनाओ, बच्चों से 

बुजुर्गों तक यह त्योहार तुम रोज मनाओ,

आजाद भारत में था इसका योगदान 

इसीलिए मिला इसे हिन्दी दिवस का विशेष स्थान,

असंख्य भारतीयों की बनी वह 


"राजभाषा"

विश्व भर में कहलायी "राष्ट्रभाषा "

राष्ट्र भाषा की बोली है न्यारी 

यह हमारी हिन्दी प्यारी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Children