इस शहर को जिंदगानी की जरूरत है
इस शहर को जिंदगानी की जरूरत है
इस शहर को जिंदगानी की जरूरत है।
घरों में बच्चों को कहानी की जरूरत है।
दोस्ती के लिए थोड़ी नादानी की जरूरत है।
जीने के लिए थोड़ी बेईमानी की जरूरत है।
मेरी बेहतरी के लिए ना मुझे कोई उपदेश दो,
रहने दो जी बस मेहरबानी की जरूरत है।
सीने में सजा कर क्यों रखे हैं ये गिले -शिकवे,
होठों पर मुस्कान,आंखों में पानी की जरूरत है।
जुगनू तारे तितली पकड़ने की हसरत ना भूल,
बच्चों सी नादान मनमानी की जरूरत है।
अपने होंठों पर नाजुक शब्दों को सजा ले,
तेरी हर बात में रूहानी की जरूरत है।
उबलता लहू तेरा तन मन जला रहा है,
रंगों में पानी सी रवानी की जरूरत है।
खिले हुए फूलों में अपनी ग़ज़ल रख दे,ऐ सुधीर,
और फूलों में रात की रानी की जरूरत है।
