STORYMIRROR

Sudhir Kumar

Others

4  

Sudhir Kumar

Others

जिंदगी मुझ पे तू एक अहसान कर

जिंदगी मुझ पे तू एक अहसान कर

1 min
417


जिंदगी मुझ पे तू एक अहसान कर।

दे दे रिहाई जिस्म को, आसान कर।


है खो चुकी बच्चों में वो मासूमियत,

हो सके उनको ज़रा नादान कर।


पाले हुए है आदमी खुदगर्जीयां,

इंतहा है यह सब्र की ,पहचान कर।


इंसान हो इंसान को तू प्यार कर,

क्या करेगा इससे ज्यादा जान कर।


चाहिए सुकून ए दिल तो काम कर,

नींद ले ! राहत की चादर तान कर।


अब नहीं मुझको किसी का इंतजार,

तू जो चाहे ! अब वही फरमान कर।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन