Shailaja Bhattad
Classics
जब इरादे हों नेक
तो सवार दे जीवन अनेक।
जब शुक्राना हो मिज़ाज
संभव हो जाता है हर काज़।
हो जाता है हर उलझन का नाश
बन जाती है किस्मत बुलंद।
करने लगते हैं हम
तक़दीर पर नाज़।
सबकी होली
जयश्री राम
ओम नमः शिवाय
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
राम- भरत
श्री राम- भरत
हिन्दी नारे
श्रीराम
प्रेम हृदय में तभी उपजता, जब मन-रार मिटाये हों।। प्रेम हृदय में तभी उपजता, जब मन-रार मिटाये हों।।
क्षमा करो हे नाथ,आन प्रभु विपदा टारो। पकड़ो मेरो हाथ , कष्ट से मुझे उबारो ।। क्षमा करो हे नाथ,आन प्रभु विपदा टारो। पकड़ो मेरो हाथ , कष्ट से मुझे उबारो ।।
संरचना हुई महाकाव्य की, उपमा कालिदास की विशिष्ट हुई। संरचना हुई महाकाव्य की, उपमा कालिदास की विशिष्ट हुई।
गुजिया मिठाई साथ में चखने को लाई है कृष्णा प्रियतमा गुजिया मिठाई साथ में चखने को लाई है कृष्णा प्रियतमा
सुध-बुध खोई धरी अंकवारी, प्रेम के रंग रंगी हाए पिया से, सुध-बुध खोई धरी अंकवारी, प्रेम के रंग रंगी हाए पिया से,
दिल में रहने वाला शख़्स इश्क़ था राधे का, या दिल और जिंदगी में चल रहा कोई जंग था। दिल में रहने वाला शख़्स इश्क़ था राधे का, या दिल और जिंदगी में चल रहा कोई जंग...
बस कविता का ही हिस्सा था हाॅं ये मेरे सपनों का किस्सा था..। बस कविता का ही हिस्सा था हाॅं ये मेरे सपनों का किस्सा था..।
उसको महफ़िल में रुसवा करता है, कपड़े तो दोनों ने उतारे थे मोहब्बत में ? उसको महफ़िल में रुसवा करता है, कपड़े तो दोनों ने उतारे थे मोहब्बत में ?
हम भी आधी दुनिया है, यह काफी है, बताने के लिये। हम भी आधी दुनिया है, यह काफी है, बताने के लिये।
पूरित हो सभी पाठक गण व कवियों की मनोवांछित कामनाएं। पूरित हो सभी पाठक गण व कवियों की मनोवांछित कामनाएं।
मेरा तो जीने में दम घुटता है मेरा सवाल है कि मरने से क्या होगा...!! मेरा तो जीने में दम घुटता है मेरा सवाल है कि मरने से क्या होगा...!!
तेरी आहट जो मिली जाने कहां सब खो गयी। तेरी आहट जो मिली जाने कहां सब खो गयी।
सबके साथ समानता से व्यवहार करने की सबके मन में प्रेम भाव जगाने की। सबके साथ समानता से व्यवहार करने की सबके मन में प्रेम भाव जगाने की।
लेकिन बस वक्त ही है, जिसने सभी के पर्दों को हटा के रखा है। सलीखा पर्दे का भी अजीब रखा लेकिन बस वक्त ही है, जिसने सभी के पर्दों को हटा के रखा है। सलीखा पर्दे का भी ...
एक दूजे को रंग लगाके खेलें प्रेम से होली एक दूजे को रंग लगाके खेलें प्रेम से होली
प्रेम मुक्ति है ... प्रेम समर्पण है... प्रेम निश्छल गंगा की जलधार है ! प्रेम मुक्ति है ... प्रेम समर्पण है... प्रेम निश्छल गंगा की जलधार है !
अपने लिए तो जीते हैं बावा सब मगर औरोंके लिए क्या कभी तुमने जिया है। अपने लिए तो जीते हैं बावा सब मगर औरोंके लिए क्या कभी तुमने जिया है।
नारी का हर रूप अनोखा होता है नारी एक संरचना होती है।। नारी का हर रूप अनोखा होता है नारी एक संरचना होती है।।
मुस्कुराके कलियों ने घूंघट पट खोले जिधर नजर दौड़ाओ ईश्क का साया। मुस्कुराके कलियों ने घूंघट पट खोले जिधर नजर दौड़ाओ ईश्क का साया।
इत्ती ज़रा सी बात को हम समझ नही पाए बरसों। इत्ती ज़रा सी बात को हम समझ नही पाए बरसों।