STORYMIRROR

Rajit ram Ranjan

Tragedy Fantasy

4  

Rajit ram Ranjan

Tragedy Fantasy

इंटरनेट के रिश्ते से अब ऊब गए

इंटरनेट के रिश्ते से अब ऊब गए

1 min
335

सुख-दुख बांटने वाला है नहीं कोई पास

जिसको देखो यहां हर कोई है उदास

अपनों पर भी अब तो रहा नहीं विश्वास


कौन है दुश्मन कौन हितैषी कौन रहा अब खास

टेक्नोलॉजी की दुनिया में सब डूब गए हैं

हम तो भैया इंटरनेट के रिश्ते से अब ऊब गए हैं !


फेसबुक वाले सोशल ऐप पे

कटने लगे हैं अब तो दिन,

स्नैपचैट पर फोटो पोस्ट

करते हैं गिन-गिन,


एमएक्स टकाटक स्नेक पर

वीडियो बनाते हैं तिनक,धिन-धिन,

नाचे नागिन बजे जैसे बिन,

डुओ से वीडियो कॉलिंग खूब किए हैं,

हम तो भैया इंटरनेट के रिश्ते से

अब उब गए हैं !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy