STORYMIRROR

Sonal Bhatia Randhawa

Tragedy

3  

Sonal Bhatia Randhawa

Tragedy

इंसानियत

इंसानियत

1 min
231

बनने से पहले हिन्दू या मुसलमान

हर आदमी शायद था सिर्फ इंसान

आया था जब इस जहां में

कैसे पता वह क्या था।


लहू तेरा था या मेरा

रंग तो लाल ही था

फिर किसने तुझे बताया

तू हिन्दू है या मुसलमान।


खुदा ने बनाया इंसान

या इंसान ने बनाया खुदा

यह तेरा खुदा है

यह मेरा खुदा है।


कभी सोचा जानवरों का

खुदा है कहाँ

वह सब तो फिर भी

साथ साथ रहते हैं।


तू तो जानवर से भी

बदतर हो गया इंसान

तू तो हर घड़ी जाने

कितने टुकड़ों में है बंटता।


पैदा तो तू हुआ था इंसान

मजहबी जुनून ने

बना दिए तुझको हैवान !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy