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Anwita Kumari Pathak

Romance Tragedy


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Anwita Kumari Pathak

Romance Tragedy


क्या फिर मिला होगा तुझे

क्या फिर मिला होगा तुझे

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मेरा पहला प्यार था तू,

मेरा गर्म सा एहसास और वही पहला प्यार...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


मेरी नज़र का वो तुझे देखना,

कुछ प्यार भरी शर्म से...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


तेरी हर गलती पर मेरा मुस्कुरा देना,

ऐसा पागलपन...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


मुझसे ही नहीं मेरी बातों से भी मोहब्बत थी तुझे,

तेरी ही बातों का साथी...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


मेरे प्यार का नटखट इज़हार,

वो पहली बार- वो आखिरी बार...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


चुप रहने की आदत नहीं है मेरी,

लेकिन तेरी हर बात सुनने का इंतज़ार...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


तेरे हाथ को सदा थामे रहना,

कुछ हिफाज़त से तो कुछ डर से...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


मैंने कुछ भी तो नहीं छुपाया था तुझसे,

अपने हर जज़्बात को लफ्ज़ों में पिरो देना...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


रूठना तो आता ही नहीं था मुझे,

पर तुझे तो हर बार मनाया था ना,

ऐसा मनाने वाला...क्या फिर मिला होगा तुझे ?


जाते हुए हर बार तुझे मुड़ कर देखना,

आदत से मजबूर वो अधूरा-सा हमसफर...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


तुझे ढूंढते-ढूंढते शायद खुद को ही खो दिया था मैंने,

मेरे अंदर का बचपन...

क्या फिर मिला होगा तुझे ?


सर्दी में रोशनी तो आज भी दिखती है,

पर धूप की गर्मी गायब है,

मेरा पुराना गर्म-सा एहसास...क्या फिर मिला होगा तुझे ?


आँखों के आँसुओं को बर्बाद नहीं किया था,

बस मोतियों की तरह बिखरा दिया था,

वैसा एक भी मोती...क्या फिर मिला होगा तुझे ?


दुनिया के सामने बेईमान बन जाती हूँ मैं,

ताकि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न लगे,

वफ़ा का ऐसा नमूना...क्या फिर मिला होगा तुझे ?


लोग कहते हैं मैंने टूटकर प्यार किया था तुझे

पर तू जो दिल के हज़ार टुकड़े करके गया,

उनमें से कोई एक भी टुकड़ा...क्या फिर मिला होगा तुझे ?


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