Monika Sharma "mann"
Tragedy
पर्यावरण पर संकट आया
यह तो है केवल इंसान की माया
अपना विकास नित करता जाता
उसका स्वार्थ नित बढता जाता
इमारतें ऊंँची बनाता जाता
प्रदूषण नित बढ़ाता जाता
अब तो बन जाओ तुम
रक्षक बहुत बन चुके तुम भक्षक।
दर्द
मस्तिष्क में ...
सम्मान करें
पर्यावरण का द...
इंसान की माया
हरियाली फैलाए...
प्रकृति का श्...
हमारा आधार
पर्यावरण महान
प्रकृति के आध...
शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही। शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही।
लो अग्नि संस्कार किया स्त्री विमर्श में अपने हाथों से लिखें पृष्ठों का। लो अग्नि संस्कार किया स्त्री विमर्श में अपने हाथों से लिखें पृष्ठों का।
आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द। आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द।
#JusticeForPriyankaReddy पॉलिटिक्स का एक नया कारण बन गई, मेरी कहानी को निर्भया, अशिफ़ा के साथ जोड़ गय... #JusticeForPriyankaReddy पॉलिटिक्स का एक नया कारण बन गई, मेरी कहानी को निर्भया,...
पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहाती है। पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहात...
राजनीति सुविधा हुई ,बनी आज व्यवसाय। मीठा-मीठा गप्प सब, कड़वा थूकत भाय।1। राजनीति सुविधा हुई ,बनी आज व्यवसाय। मीठा-मीठा गप्प सब, कड़वा थूकत भाय।1।
मन में कष्टों को बंधी किए, जीवन की एक उमंग हूं मैं, पुरुष हूं मैं। मन में कष्टों को बंधी किए, जीवन की एक उमंग हूं मैं, पुरुष हूं मैं।
सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है। सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है।
अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं। अब स्वतंत्र है वो तो पराश्रित मैं भी नहीं इस अर्थहीन पानी का अर्थ कुछ भी नहीं...
अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर। अगन लगी हुई है,मेरे इस हृदय के बहुत भीतर।
और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में। और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में।
पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान। पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान।
जीवन इतना सरल नहीं जीवन इतना सरल नहीं
यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं। यह मन के जुगनू हमें कभी अस्त व्यस्त तो कभी मस्त मस्त रखते हैं।
टूट गई मन की गागरिया टुकड़े झोली भरती। रंगहीन ले...य़ टूट गई मन की गागरिया टुकड़े झोली भरती। रंगहीन ले...य़
नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अपना जीवन। नाराज हूँ...!! उन तमाम बच्चों से जो फ्रस्ट्रेशन में आकर खो देते हैं अप...
पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है। पुस्तकों में जो कुछ वर्णन पढ़ा था उससे भी भीषणतम क्रूर कलियुग है।
आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है। आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है।
आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है। आखिर क्यों लाखों परिवार न्याय से वंचित रह जाते है।
किन्तु, ख़ुद ख़त्म होने से पहले ही, पहुँच में उसके दूसरी कुर्सी। किन्तु, ख़ुद ख़त्म होने से पहले ही, पहुँच में उसके दूसरी कुर्सी।