Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Satyawati Maurya

Romance Tragedy Classics

4.5  

Satyawati Maurya

Romance Tragedy Classics

इक बूँद स्वाति -सी

इक बूँद स्वाति -सी

1 min
297


उड़ा ले गया नींदें मेरी

सपनों के इधर न लगते फेरे।


उम्मीदों की बैसाखी लेकर

मंज़िल पाने के आस अधूरे।


धड़कन पल-पल राहत खोजे

अंजित नैन अश्रु जल घेरे।


*बैरी चाँद* कह तो ज़रा आकर

प्रीतम के पग कब करेंगे फेरे?


दरस की इक बूँद स्वाति पीने को

प्यासे आतुर प्राण सीप हुए मेरे।


क्या मैं यहाँ आकुल-व्याकुल जी ती

मुझ बिन तनिक न उर बिछोह है तेरे।


बैरी चन्दा गगन में घटता-बढ़ता

तुम बिन दिन-रात हुए अमावस मेरे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance