Kshitij Bhatt
Drama
देखकर तुझे
इश्क जतलाऊँ क्या,
बस तेरा ही हूँ
बतलाऊँ क्या ?
कलम खामोश थी
पहले प्यार का...
बर्बाद-ए-इश्क
पहले प्यार की...
दर्द-ए-मोहब्ब...
बेवफ़ाई
हम दिल से दूर...
रिक्तता
इजहार-ए-मोहब्...
मगर प्रेम में अर्पित आवारा सा नैन स्पर्श की ताक में हूँ।। मगर प्रेम में अर्पित आवारा सा नैन स्पर्श की ताक में हूँ।।
हर पल पर- हित का चिंतन करें, वे सब ही जन हैं सच्चे सुपर-मैन। हर पल पर- हित का चिंतन करें, वे सब ही जन हैं सच्चे सुपर-मैन।
बेचैनी भी अच्छी लगती है कभी खुद को खोजकर तो देखो जरा। बेचैनी भी अच्छी लगती है कभी खुद को खोजकर तो देखो जरा।
ऐसे में सच्चा प्यार तो बस किस्सों में ही मिल पाता है ! ऐसे में सच्चा प्यार तो बस किस्सों में ही मिल पाता है !
शब्दों से सिंहासन हिला रचता एक क्रांति मैं शब्दों से सिंहासन हिला रचता एक क्रांति मैं
ऐ ज़िन्दगी, तू सिखाने का, कीमत क्यों तय नहीं कर लेती है, ऐ ज़िन्दगी, तू सिखाने का, कीमत क्यों तय नहीं कर लेती है,
अपने लिए सुविधाओं को जुटाने में स्वयं की जड़ काटता जा रहा है। अपने लिए सुविधाओं को जुटाने में स्वयं की जड़ काटता जा रहा है।
कभी झरनों जैसी अधीर बहती, कभी शांत सागर समान थमती। कभी झरनों जैसी अधीर बहती, कभी शांत सागर समान थमती।
जिंदगी का इंजन और डिब्बों का रिश्ता सफर।। जिंदगी का इंजन और डिब्बों का रिश्ता सफर।।
दिल को फिर न कुछ मेरे, अब दरकार है। दिल को फिर न कुछ मेरे, अब दरकार है।
नज़र नहीं आती आजकल शायद राह बदल ली। नज़र नहीं आती आजकल शायद राह बदल ली।
हाय रे मजबूर किस्मत आज फिर तूने उसकी तकदीर से वह सूखी ब्रैड हटा दी। हाय रे मजबूर किस्मत आज फिर तूने उसकी तकदीर से वह सूखी ब्रैड हटा दी।
जाने क्या खता हुई हमसे अजनबी बन रह गए। जाने क्या खता हुई हमसे अजनबी बन रह गए।
अंदर छुपे उस शख्स को कैसे समझाऊँ कि समलैंगिकता बाहर लाना कितना मुश्किल है। अंदर छुपे उस शख्स को कैसे समझाऊँ कि समलैंगिकता बाहर लाना कितना मुश्किल है।
परन्तु समय से भी तेज मैंने लोगों को बदलते देखा। परन्तु समय से भी तेज मैंने लोगों को बदलते देखा।
ना ना ये बिल्कुल ना सोचना उदास ना हूं मैं। ना ना ये बिल्कुल ना सोचना उदास ना हूं मैं।
निष्ठुर प्रियतम मेरी तरह क्या चांद को भी कल बहुत याद आए थे ? निष्ठुर प्रियतम मेरी तरह क्या चांद को भी कल बहुत याद आए थे ?
जो झूठ से बाबस्त है वो सच के आगे कहाँ टिकते हैं। जो झूठ से बाबस्त है वो सच के आगे कहाँ टिकते हैं।
खैर, जो भी है, मेरा सच है उन्हें ये पलक आज कल रूठी लगती है। खैर, जो भी है, मेरा सच है उन्हें ये पलक आज कल रूठी लगती है।
अंग प्रत्यंग बेकार कर देगा नशा ये मौत का नशा है अंग प्रत्यंग बेकार कर देगा नशा ये मौत का नशा है