STORYMIRROR

MS Mughal

Tragedy Action Fantasy

4  

MS Mughal

Tragedy Action Fantasy

हुस्न ए ताब ए तुराब

हुस्न ए ताब ए तुराब

1 min
369

कई राज़ दफ़न है, हुस्न ए ताब ए तुराब में 

के आते हो जो तुम , निक़ाब ए हिजाब में 


हुस्न ए ताब ए तुराब ( मिट्टी के हुस्न की चमक ) 


हर सु हंगामा बरपा है, तेरे हुस्न ए नाज़ का

क्या सौज़ है हुस्न का, शबाब ए लुहाब में 


शबाब ए लुहाब ( जवानी की आग ) 


हर एक अदा पर तेरे, चमन जो महक उठा

ऐसा भी क्या रश्क है, शहाब ए गुलाब में


शहाब ए गुलाब ( गहरा लाल रंग का गुलाब ) 


खुमार ए इश्क़ की दास्तां लबों पे है क़ायम

अजब सा खुमार है ये, शराब ए हबाब में 


शराब ए हबाब ( शराब के बुलबुले ) 


न कोई सूर है न कोई ताल है यहां 'हसन'

दमा दम आती आवाज़ रबाब ए रूबाब में


रबाब ए रूबाब ( वीणा के तार ) 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy