हुस्न ए ताब ए तुराब
हुस्न ए ताब ए तुराब
कई राज़ दफ़न है, हुस्न ए ताब ए तुराब में
के आते हो जो तुम , निक़ाब ए हिजाब में
हुस्न ए ताब ए तुराब ( मिट्टी के हुस्न की चमक )
हर सु हंगामा बरपा है, तेरे हुस्न ए नाज़ का
क्या सौज़ है हुस्न का, शबाब ए लुहाब में
शबाब ए लुहाब ( जवानी की आग )
हर एक अदा पर तेरे, चमन जो महक उठा
ऐसा भी क्या रश्क है, शहाब ए गुलाब में
शहाब ए गुलाब ( गहरा लाल रंग का गुलाब )
खुमार ए इश्क़ की दास्तां लबों पे है क़ायम
अजब सा खुमार है ये, शराब ए हबाब में
शराब ए हबाब ( शराब के बुलबुले )
न कोई सूर है न कोई ताल है यहां 'हसन'
दमा दम आती आवाज़ रबाब ए रूबाब में
रबाब ए रूबाब ( वीणा के तार )
