खुला पक्षी
खुला पक्षी
जब उड़ा है खुल के बागों में पक्षी कोई
घात में बैठा है हर सू नरभक्षी कोई
क़त्ल कर के नादाँ का उसने कह दिया
क्या है मैरे जैसा घातक रक्तक्षी कोई
आस्तीं के सांप से बच सकते नहीं
है नहीं इन की तरह घा-दक्षी कोई
आज कल माहौल भी कुछ ऐसा ही है
हिंसदक्षी है कोई रक्तक्षी कोई
झुक गए सब क़ातिलों के आगे 'हसन'
अब कहाँ बाक़ी रहा संहारक्षी कोई
