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Neetu Tyagi

Tragedy

4.5  

Neetu Tyagi

Tragedy

हरीश तुम्हारे लिए

हरीश तुम्हारे लिए

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तुम्हारी आत्मा आज कुछ आराम से होगी
मुक्त गगन में उन्मादी सी फिरती होगी
तेरह सालों की कैद से बाहर आते ही
कुछ सुकून के पल होंगे
कुछ गिले शिकवे होंगे
तुम मत बात करना उस ईश्वर से
जिसने कैद कर दिया था

तुम्हारी आत्मा को तुम्हारे शरीर में 

 जिसने बंद कर दिया तुम्हारे 

 शरीर का हर द्वार
 और  कोशिश की हर बार
तुम्हें उस शरीर की गुफा में

 कैद कर लेने की बारंबार
उससे कह देना धरती पे रहते है 

तुझसे भी ज्यादा दयालु लोग 

 जिन्होंने मांगी तुम्हारे लिए
और दे दी तुम्हे इच्छा मृत्यु !!


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