महिला दिवस
महिला दिवस
काश महिला दिवस पतझड़ में
न आया होता
और अगर आता
तो सूखे पत्तों सा झड़
गया होता तुम्हारा अहम्
नये पत्तों का वस्त्र
तुमने भी सिला ही लिया होता
तो कुछ कम हो जाता
कुछ होने का वहम !!
