शिव और शक्ति
शिव और शक्ति
हां ! मैं कुछ अधूरी हूं
सजने में,संवरने में
घर के काम में
बहू के रूप में
मां के स्वरूप में
पत्नी के वेश में
बेटी की बतकही में
बहन की दी हुई सीख में
पर मैं पूर्ण हूँ
करुणा में,दया में,
स्नेह में, अन्याय के
प्रति क्रोध में
स्त्री हिंसा के
प्रतिरोध में
शिव और शक्ति
दोनों के रूप में ।।
