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Rashmi Singhal

Romance

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Rashmi Singhal

Romance

हमने देखा है उन्हें

हमने देखा है उन्हें

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अक्सर !

कुछ याद करके,

दबे होंठों से 

मंद-मंद मुस्काते हुए,

बारिशों की आड़ में गम के

आँसू बहाते हुए,


अक्सर !

छत पर,रात के साए में

चाँद से बतियाते हुए,

बैचेनियों से छटपटाकर

कमरे के चक्कर लगाते हुए,


अक्सर !

किनारे बैठकर झील की 

गहराईयों से दर्द अपना

आँकते हुए,

*पक्षियों के प्रेमी-जोडों को

अपलक ताकते हुए,


अक्सर !

जुगनुओं के संग जुदाई के

गीत गुनगुनाते हुए,

तोड़कर पत्ती-पत्ती फूल की

लव मी-लव मी नाट् दोहराते

हुए,


अक्सर !

उनको हमारे प्रेम-प्रतीक

स्थानों पर आते-जाते हुए,

देवालयों में दुआ में सर 

झुकाते हुए,


अक्सर !

रह जाते हम भी खुद को ये

समझाते हुए,के

करते है वो शायद,आज 

भी मोहब्बत हमसे, ये

यकीन, खुद को दिलाते हुए। 


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