Raja Singh
Romance
जब कभी भी एकांत
पास बैठा हो,
तुम्हें नजर आयेगी
हमारी सूरत।
जब कभी भी भोर
झरोखे से झांके,
तुम्हें याद आयेगी
हमारी शीशागीरी।
जब कभी भी बदली
पास खड़ी हो,
तुम्हे याद आयेगी
हमारी रुसवाई।
जब कभी भी निशा
आगोश में ले,
तुम महसूस करोगी,
तुम मेरा आलिंगन।
भारत माता
देवी माँ सरस्...
हमारी याद
भूख
बीमारी का पोस...
प्रतिरोध
तुम्हारे लिए
तलाश
चाहतें
जहमत नहीं हुई
तेरी आहट से तेरे आने का एहसास है मुझे, जैसे विरासत में बसी हुई कोई कहानी। तेरी आहट से तेरे आने का एहसास है मुझे, जैसे विरासत में बसी हुई कोई कहानी।
मैंने दिल के कागज़ पर तेरा नाम लिख लिया। मैंने दिल के कागज़ पर तेरा नाम लिख लिया।
जीवन हो गया खुशहाल बस एक उनकी मुस्कान जीवन हो गया खुशहाल बस एक उनकी मुस्कान
बीच राह जो छूट जाऐ इस तरह तो हाथ मैंने नहीं थामे। बीच राह जो छूट जाऐ इस तरह तो हाथ मैंने नहीं थामे।
सदियों बाद भी तुम वैसे के वैसे हो जैसे दशकों पहले हुआ करते थे। सदियों बाद भी तुम वैसे के वैसे हो जैसे दशकों पहले हुआ करते थे।
बहता रहता इस आशा से मिलेंगे सागर में जरूर प्यार से। बहता रहता इस आशा से मिलेंगे सागर में जरूर प्यार से।
काश ....... तुम मेरे होते ! तो ये नजारे कुछ और होते। काश ....... तुम मेरे होते ! तो ये नजारे कुछ और होते।
सब ख़ाख़ हो गया मेरा बस एक अधूरी दास्ताँ के निशां ही रहे गया... सब ख़ाख़ हो गया मेरा बस एक अधूरी दास्ताँ के निशां ही रहे गया...
सावन की बूंदे मन को हर्षा रही हैं , ऐसे मैं तेरी याद मुझको तड़पा रही है। सावन की बूंदे मन को हर्षा रही हैं , ऐसे मैं तेरी याद मुझको तड़पा रही है।
लिखे थे जो मोहब्बत के खत बहुत, देखना कहीं, याद कर उन्हें आँसू ना बह जायें, लिखे थे जो मोहब्बत के खत बहुत, देखना कहीं, याद कर उन्हें आँसू ना बह जायें,
मन में प्रेम फुहार फूट रही है तन में विरह की अग्नि लगी है मन में प्रेम फुहार फूट रही है तन में विरह की अग्नि लगी है
अबकी सावन तुम बिन बरसा मन का कोना- कोना फिसला। अबकी सावन तुम बिन बरसा मन का कोना- कोना फिसला।
मैं ही मैं थी तुम्हारे आने से पहले, अब हम ही हम पहली बारिश में साथ। मैं ही मैं थी तुम्हारे आने से पहले, अब हम ही हम पहली बारिश में साथ।
मैं तुम्हें अपने दिल में रखूँगा हमेशा के लिए मैं तुम्हें अपने दिल में रखूँगा हमेशा के लिए
नटखट नंदकिशोर माधव कुंज बिहारी, मुरलीधर बंशीधर राधेश्याम है नाम म्हारा। नटखट नंदकिशोर माधव कुंज बिहारी, मुरलीधर बंशीधर राधेश्याम है नाम म्हारा।
खुद को मुकम्मल कर , इस जग में खुद सबसे खुशनसीब बना लूं ।। खुद को मुकम्मल कर , इस जग में खुद सबसे खुशनसीब बना लूं ।।
ख्याल जुदा है फिर भी इक डोर बंधी सांसों की। ख्याल जुदा है फिर भी इक डोर बंधी सांसों की।
कसम से उस वक्त बस तेरे ही पहलू में रोने का मन करता है, "कभी बस यूं ही........... कसम से उस वक्त बस तेरे ही पहलू में रोने का मन करता है, "कभी बस यूं ही...........
कसम से तुम बोलते हुए बहुत अच्छे लगते हो। कसम से तुम बोलते हुए बहुत अच्छे लगते हो।
हल्की हल्की बारिश ठंडी ठंडी फुहार ऐसे में आ गई तुम्हारी याद बेहिसाब। हल्की हल्की बारिश ठंडी ठंडी फुहार ऐसे में आ गई तुम्हारी याद बेहिसाब।