Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Nand Kumar

Children


3  

Nand Kumar

Children


हमारी साइकिल

हमारी साइकिल

1 min 182 1 min 182


दो पहियों पर चलती जाती, 

साइकिल है अति न्यारी।

पड़े न ईंधन चले खर्च बिन,

साइकिल सदा हमारी ।।


कच्ची पक्की सड़क हो चाहे,

हो पगडंडी टेढ़ी संकरी ।

फर्राटे भर चलती जाती,

कभी नहीं वो अखरी ।। 


बचत और व्यायाम कराती,

रखे निरोगी सुन्दर काया ।

स्कूल हाट मित्रों के घर पर , 

झटपट उसने पहुंचाया ।।


जले न ईधन शोर ना होवे, 

शुद्ध वायु मिलती जाए।

नहीं शोरगुल होता इससे,

साइकिल सदा लुभाए ।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Nand Kumar

Similar hindi poem from Children