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SUMAN ARPAN

Romance

3  

SUMAN ARPAN

Romance

हम सफ़र

हम सफ़र

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हमसफ़र मेरे हमसफ़र,चाहूँ मैं तुमको कुछ इस कदर!

हमसफ़र मेरे.... 

काँटा जो देखूँ तेरी राह में,

फूल बन के बिछ जाऊँ,तेरी चाह में!

हमसफ़र मेरे...

ग़र धूप जीवन में कभी तेज होगी,

आचंल से अपने छाया करूँगी!

हमसफ़र मेरे.....

थक जाएगा जब धूप में दौड़ हारकर,

पेड़ बन कर तुझ को सहारा मैं दूँगी!

हमसफ़र मेरे...,

कुछ पाने की चाहने की तुझे जब प्यास होगी,

बन के मैं नदियाँ तृप्ति करूँगी!

हमसफ़र मेरे....

जब प्रेम तेरा पुकारेगा मुझको ,

बन के मैं राधा कृष्ण कृष्ण जपूँगी!

हमसफ़र मेरे....

तु चंदा मैं तेरी चाँदनी,तू राग तो मैं तेरी रागिनी!

साया हूँ तेरा परछाई बन कर संग संग चलूँगी!

हमसफ़र मेरे.....

ग़र मौत भी खड़ी होगी, कभी तेरी राह में,

बन के सावित्री मैं यम से लड़ूँगी !

हमसफ़र मेरे हमसफ़र,चाहूँ मैं तुम को कुछ इस कदर!



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