Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Priyanka Singh

Tragedy


4.7  

Priyanka Singh

Tragedy


हिसाब बराबर

हिसाब बराबर

1 min 240 1 min 240

लवो पर नाम उसके मेरा था

पुकार रहा था वो बारबार मुझे

मै अनसुना कर चलती चली गई

मुड़ मुड़कर लोग देख रहे थे हमे


आज हिसाब बराबर हुआ

मैं ये सोच धीरे से मुसकाई

वक्त भी थोडा़ मुसकाया

बीता कल फिर याद आया


ये वही जगह है प्यारे, यहाँ

कितनो का दिल तोडा़ तूने

खिलौना समझ खेला तूने

कितने जीवन बरबाद किये


मैने कितना तुझको समझाया था

दौलत और चालकी से नही तुम

दिल पर किसी के राज कर सकते

एक दिन बहुत पछतायेगा


जिस दिन कोई तुझको ठुकरायेगा

सच्चा प्यार तुझे समझ आयेगा

ये तेरी नादानी थी प्यारे

लोगो के जज़्बातो से खेला तूने


आज नहले को दहला मिला है

प्रभु सब तेरी माया है

तुझे तेरी गुरु मिली गई

पाठ सीखा कर चली गई


वो मेरी ही सहेली थी, जिससे

तूने सच्चा प्यार किया

तुझको सबक सिखाने आई थी

मेरी याद दिलाने आई थी


कड़वा है पर सच है प्यारे

तुझको सबक सिखाना जरुरी था


तभी तो तुमने मुझको पुकारा

मेरी सहेली को जो दिल से तुमने चाहा

पर अब पुकारे होता क्या है

जब चिड़िया चुग कर हो गई फुर्र।।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Priyanka Singh

Similar hindi poem from Tragedy