ओट दीये की
ओट दीये की
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ओट बन जाओ दीये की
ज्योत को तुम बुझने ना देना,
जो लौ दिलों मे जलाई है
आत्म सम्मान की,
अपने अधिकार की,
उसको यूँ ही जलाये रखना,
लाख बुझाना चाहे दुनिया।
देकर संस्कार ,रीति रिवाज का नाम
अपनी मर्यादा मे रहकर
जीवनपथ पर आगे बढ़ते रहना,
ज्योत से ज्योत जलाकर
इस लौ को आगे जलाते रहना,
बनकर ओट दीये की तुम
इस ज्योत को बुझने ना देना।
