Chhabiram YADAV
Abstract
हिंदुस्तान हमारा है प्राणों से प्यारा
हम सब का मान है अभिमान है
हिन्दू मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई
आपस में मिलजुकर रहते
तरह तरह के पंथ यहाँ है
सब का ईश्वर एक ही कहते
निज आन मान निज गौरव का
मतलब हिंदुस्तान ही है कहते।
होली की वेदना
होली आई
नीर का पीर
उम्मीद
हँसना मना नही...
खुदगर्जी
नकली चेहरा
चीखती ख़ामोशी
गजल
समय की मार
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई। नरान्तक और बिन्दुमती ने स्वर्ग की गति थी पाई।
मैं और कुछ नहीं जानती बस इतना जानती हूँ कि उसने प्रेम किया था। मैं और कुछ नहीं जानती बस इतना जानती हूँ कि उसने प्रेम किया था।
किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का किसने आपको हक दिया है कुछ भी कह लेने का
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो। जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो।
लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते। लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कुत्ते लेकिन खोज के लाओ, पहले वो इन्सानी कु...
डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे। डरना छोड़ो अब हौसला भरो, लड़ो, कब तक मुँह चुराओगे।
इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व। इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व।
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
लेकिन मेरा यकीं करो, मैंने सुनी है चीख उन पंछियों की जिनके पर कतर दिए गए : लेकिन मेरा यकीं करो, मैंने सुनी है चीख उन पंछियों की जिनके पर कतर दिए गए :
शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बेटियाँ। शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बे...
मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही... मैं कहाँ ले जाऊँ मन मेरा... तुझसे बिछड़ने को तैयार नही...