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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Inspirational

हिंदी दिवस पर

हिंदी दिवस पर

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हिंदी है भाषा हमारी,

संस्कृति की पहचान,

भावों की ये माला है,

सृजता इसमें हर गान।


सरल, सजीव, सुगम ,

हर दिल पुकार परम,

सबको जोड़े धुआँधार

अपने में अपरम्पार।


संस्कृति धन है इसमें,

ज्ञान का असीम सागर,

माटी की सौंधी खुशबू,

हर शब्द भाषाई गागर।


वेदों की वाणी अनुपम,

कवियों का मन निरुपम,

जन-जन की अभिव्यक्ति ,

भारत की ये शानशक्ति।


आओ हम हिंदी अपनाएं,

इससे सबके मन बहलाएं,

विश्व में रखे ख्याति भारी,

सबको लगती बड़ी प्यारी।


हिंदी बनी हमारी ताकत,

इससे बंधे हम अभ्यागत,

इसकी गूंज है हर दिल में,

इस पर गर्व है हर जन में।


इसमें बसी है भारत की,

सदियों पुरानी पहचान।

संवादों का ये सेतु बनी,

जोड़े हर दिल को,कनी


मातृभाषा की ममता सी,

मीठी लगती अपनी सी,

हर शब्द में है अपनापन,

खुश होता इसे सुन मन


कभी कविताओं में गूंजे,

कभी गाथाओं को चूमें,

इसमें सजे हमारे सपने,

भावों भरी उमंग अपने ।


हिंदी में है अद्भुत शक्ति,

देश प्रेम, की प्रेरक भक्ति

इसकी महिमा को अपना,

हम दुनिया को दें सपना।


विज्ञान, कला, साहित्य हो, 

गाँव शहर या कस्बा हो

हिंदी है हर कदम पर रथ,

हमारा अमिट प्रबल व्रत।


आओ, हिंदी का मान करें,

इससे ,फिर-फिर प्रीत करें

इसके सम्मान में गाएं गीत,

सबको बनाएं अपना मीत।

       


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