Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Shubhra Varshney

Romance


4  

Shubhra Varshney

Romance


हां मुझे अलविदा नहीं कहना है

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है

2 mins 232 2 mins 232


 हर लम्हा तेरी याद दिलाता है,

बांटी खुशियां संग लेकर आता है ।

हर लम्हा जिसने दी है हंसी,

जिन लम्हों ने दी जीने की वजह।

उन लम्हों को खुल कर जीना है,

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है।

जब दूर होने का एहसास सताता है,

तो आंखों में नमक सा उतर आता है।

सपने बुने हैं जो जाग जाग कर,

मंजिलें पाई है जो भाग भाग कर।

किश्तों में दी जिंदगी को खुल कर जीना है,

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है।

साथ चलते चलते दूर तक जाना है,

जिंदगी की खुशबू को सांसों में बसाना है।

पाई प्रीत को बनाना है सहज गान,

अवलंबित है इसी प्रीत में मेरे प्रान।

दिनभर के श्रम को मृदु तरंग बनाना है,

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है।

जिंदगी लगी है घड़ी से दौड़ लगाने में आमदा,

मन चाहे एक पल भी तुमसे न रहना जुदा।

जीवन का संगीत सजा प्रेम राग से,

जिंदगी के हर फसाने का जिक्र तेरी बात से।

बनाकर ढाई अक्षर हर लम्हा जीना है

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है।

दुनिया के ताने बाने में दिखता है एक ही चेहरा

लम्हा तेरे साथ रुक कर समय देता है पहरा।

जीवन के रंग सजते हैं तेरी कूची से,

फिजाएं भी महकती है तेरी मेरी कहानी से।

मिलजुल के हर पल हमें साथ रहना है,

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है।

नाराज नहीं पर हैरान हूँ,

आए इस सवाल से परेशान हूं।

चांद तारों तक मेरी पहुंच रहे ना रहे,

तेरे साथ हर लम्हा मेरी मुट्ठी में कैद रहे।

हर लम्हे को बरसों तक मुझे जीना है,

हां मुझे अलविदा नहीं कहना है।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Shubhra Varshney

Similar hindi poem from Romance