Kusum Lakhera
Action Inspirational Others
मन बेचैन
भीगे मेरे नयन
बही कविता
भीतर क्रोध
बाहर विडम्बना
लिखी कविता
प्रश्नों का दौर
समस्याओं का शोर
पढ़ी कविता
व्यथित मन
निढाल सा ये तन
गाई कविता
शहर मौन
न पूछे तुम कौन
चीखी कविता
विचार
आशा की किरण
कृत्रिम बुद्ध...
संघर्ष ....
मनोवांछित
अवसाद पर प्रह...
ढलता सूरज नार...
सुर्ख़ गुलाबी ...
जब तक हरियाली...
सरसों की पीलि...
भाषाओं की तकरार नहीं धर्मों की दीवार कहाँ है भाषाओं की तकरार नहीं धर्मों की दीवार कहाँ है
मगर इस दिल का क्या करें जो आभासी नहीं पूरा का पूरा मिलना ही चाहता है। मगर इस दिल का क्या करें जो आभासी नहीं पूरा का पूरा मिलना ही चाहता है।
मजबूत रख अपने इरादे फिर ये जहां तेरा है खुशियों का तब डेरा है। मजबूत रख अपने इरादे फिर ये जहां तेरा है खुशियों का तब डेरा है।
शिष्य को यूं आगे बढ़ाना, करो काम बस निष्काम।। शिष्य को यूं आगे बढ़ाना, करो काम बस निष्काम।।
कितने हुनर पास थे कहाँ छिपे पड़े है जहां से शुरू हुआ आज भी वहीं खड़े है कितने हुनर पास थे कहाँ छिपे पड़े है जहां से शुरू हुआ आज भी वहीं खड़े है
जनमदिन खूब मंगल हो यही है कामना 'अवि' की, रहे सेहत बड़ी अच्छी हमारी जान है मोदी। जनमदिन खूब मंगल हो यही है कामना 'अवि' की, रहे सेहत बड़ी अच्छी हमारी जान है मोद...
हिंदी का अखबार पढ़ो और हिंदी ज्ञान बढ़ाओ तुम, हिंदी का अखबार पढ़ो और हिंदी ज्ञान बढ़ाओ तुम,
उसने कोविद में भी काम किया अनवरत कार्य भार सँभाला उसने कोविद में भी काम किया अनवरत कार्य भार सँभाला
केवल इक दिन ही नहीं हमने, नित हिन्दी दिवस मनाना है ! केवल इक दिन ही नहीं हमने, नित हिन्दी दिवस मनाना है !
मुहब्बत की हर फरियाद है प्रेम के अनकहे तराने है कविता मुहब्बत की हर फरियाद है प्रेम के अनकहे तराने है कविता
हृदय को हृदय से है जोड़ती, भावों को भावों से जोड़ती, हृदय को हृदय से है जोड़ती, भावों को भावों से जोड़ती,
तुम हर मुश्किल का हल कर सकती हो, करुणा का तुम बहता सागर तुम हर मुश्किल का हल कर सकती हो, करुणा का तुम बहता सागर
पढ़ना चाहती हूं मैं रिवाजों की वह किताब जिसमें कुछ भी लिखा है क्या और क्यों है ? पढ़ना चाहती हूं मैं रिवाजों की वह किताब जिसमें कुछ भी लिखा है क्या और क्यों ...
हिंदी पहने, हिंदी ओढें हिंदी बने, हिंदी बनाए। हिंदी पहने, हिंदी ओढें हिंदी बने, हिंदी बनाए।
रिश्तों के पुनर्जीवन को, हम चंद दर्द भुला देंगे।। रिश्तों के पुनर्जीवन को, हम चंद दर्द भुला देंगे।।
कठिनाइयों से डरकर जो मैदान छोड़कर भाग जाता है ऐसा व्यक्ति जीवन का हर युद्ध हार "पप्पू" कठिनाइयों से डरकर जो मैदान छोड़कर भाग जाता है ऐसा व्यक्ति जीवन का हर युद्ध ह...
मैं बना आज तक जो भी हूँ, उसमें यह सब शिक्षा तेरी है, मैं बना आज तक जो भी हूँ, उसमें यह सब शिक्षा तेरी है,
शिक्षा का आधार समाज के लिए ज़्यादा ही ज़रूरी है। शिक्षा का आधार समाज के लिए ज़्यादा ही ज़रूरी है।
सोचता हर पल, क्या यह सब, मेरी ही हैं जिम्मेदारी? प्रश्न का उत्तर तो, कभी नहीं मिलता। सोचता हर पल, क्या यह सब, मेरी ही हैं जिम्मेदारी? प्रश्न का उत्तर तो, क...
जिसके कण कण में मिठास कवि की बुझाए जो प्यास जिसके कण कण में मिठास कवि की बुझाए जो प्यास