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शायद गोदिया ज्ञान शब्द संवर कइदा प्रेम मंजिल प्रकृति लिखी थी कुछ पंक्तियाँ दया सुर गीत कलम क्रोध राग स्याही हार दर्शनवा अंतर

Hindi लिखी Poems