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Rekha Mohan

Abstract


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Rekha Mohan

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गुरैया [पर्यावरण ]

गुरैया [पर्यावरण ]

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नैन जिनको देख सदा खुश होते है

हर उम्र के लोगो में खुशी क्षण भर दे ।

फुरर उड़ खाने को इधर-उधर होते है ,

यही गुरैया की चहचाहट तो घर भर दे ।

दाना चुगे उड़ जाये या नीड़ में होते है ,

रूप बसंत कथा में इनके प्रसंग भर दे ।

बच्चे प्यार में पकड़ने खूब होते है,

उनके तेज स्वर आलम में उमंग भर दे ।

यूरिया खाद और प्रदूषण तो खूब होते है ,

गुरैया की कमी सी मन में दर्द भर दे ।

अगर जो वातावरण स्वस्थ होते है ,

पक्षी भी सूनापन में खुशी भर दे ।



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