STORYMIRROR

Nikita Panchal

Abstract

4  

Nikita Panchal

Abstract

कभी तो आया करो

कभी तो आया करो

1 min
281

कोई हसींन शाम हों और दोस्तों के साथ मिलाया करों

वैसे इश्क़ तो कॉफी से हैं पर आज़ चाय का जाम पिलाया करों


में ठहर जाती हूं, तुम कुछ प्यार के नगमे सुनाया करों

हैं अगर हमसे इश्क़ आपको तो थोड़ा जताया करों


नए हैं ईस शहर में हम, कहीं हमे गुमाया करों

अहेम दोस्त हों आप हमारे लेकिन दोस्ती हमें सिखाया करों


जीते जीते एक दौर गुज़र गया हैं ज़िंदगी के सफ़र में 

खुश रहेने का हुन्नर हैं लेकिन दर्द सहेना भी बताया करों


खो लिया हैं हमने ख़ुद को कहीं इस महेफ़िल में दोस्त

शुक्र गुज़ार होगे आपके हमें ढूंढ के हमसे मिलाया करों।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract