Nikita Panchal
Abstract
हे
सीता
पवित्र
आप तो थे
संसार नहीं
अग्निपरीक्षा दी
आपने किस लिए।
सीते
दरमियान
किसके लिए
शिवाय
तुझसे मिली
छुपाएं
आंखो में
नहीं होगी
बेरंग
तेरी जोगन
उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है। उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है।
राष्ट्रप्रेम की भावनाओं का, जिनको होता नहीं है अर्थ उन नरों का जीवन भी क्या है राष्ट्रप्रेम की भावनाओं का, जिनको होता नहीं है अर्थ उन नरों का जीवन भी क्या ह...
हिंदी का सम्मान हमारा स्वयं का देश का है सम्मान, हिंदी का सम्मान हमारा स्वयं का देश का है सम्मान,
ये एक ही ज़िंदगी में कई ज़िंदगियाँ जी लेती है। ये एक ही ज़िंदगी में कई ज़िंदगियाँ जी लेती है।
दुनिया तरक़्क़ी कर रही है साहिब! मेरा देश विकास कर रहा है दुनिया तरक़्क़ी कर रही है साहिब! मेरा देश विकास कर रहा है
यहाँ तो दरिया में पड़े पत्थर की तरह कतरा कतरा टूटा हूँ मैं यहाँ तो दरिया में पड़े पत्थर की तरह कतरा कतरा टूटा हूँ मैं
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं। जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं।
ये फफककर रो पडेंगी बेआवाज देर तक रोती रहेंगी, इनके हिस्से का सुख बस इतना सा है। ये फफककर रो पडेंगी बेआवाज देर तक रोती रहेंगी, इनके हिस्से का सुख बस ...
कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते ! कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते !
चलो दिवाली का एक नया रूप हम दिखाते हैं, दिवाली ऐसी भी होती आप सबको बताते हैं। चलो दिवाली का एक नया रूप हम दिखाते हैं, दिवाली ऐसी भी होती आप सबको बताते हैं।
क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं। क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं।
कुछ देर लगी इस नए सबक को समझने में, काफी देर लगी सच्चे रिश्ते को समझने में। कुछ देर लगी इस नए सबक को समझने में, काफी देर लगी सच्चे रिश्ते को समझने में।
गुप्त आत्मालाप से जाग्रत हो उठती है, आत्म अनुभूतियाँ। गुप्त आत्मालाप से जाग्रत हो उठती है, आत्म अनुभूतियाँ।
विरासत विरासत
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है। फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है।
मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है। मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है।
इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है। इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है।