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Nikita Panchal

Abstract

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Nikita Panchal

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तुझसे मिली

तुझसे मिली

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मेरे जिस्म से निकल के तुझसे मिली 

मेरे आने की आहट तुझे मिली


शायद मंज़ूर नहीं था खुदा को मिलना 

इसी लिए तेरी हूं किसी और से मिली।


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