STORYMIRROR

Nikita Panchal

Abstract

4  

Nikita Panchal

Abstract

शिवाय

शिवाय

1 min
401

ना आदि हैं ना अंत हैं 

वो तो मेरे महाकाल हैं


ना फूलों की महेच्छा हैं

ना महाभोग की आदत


मेरे महादेव को याद करो

ना आए कोई अड़चन


भभूत लगाएं समशान रहे

आत्माओं का उद्धार करे


सबको माने समान शिवाय

सबके हैं बने वो विश्वनाथ


बड़े भोले हैं भोलेनाथ

सबके रक्षक हैं शिवनाथ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract