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कवि सुरेश राजा

Abstract

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कवि सुरेश राजा

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बेटियां

बेटियां

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पढ रहीं बेटियाँ, बढ रहीं बेटियाँ।

नाम रोशन जहाँ में कर रहीं बेटियाँ।

भ्रुण हत्या में अब प्रतिबंध लगा,

बाल विवाह से ना मर रहीं बेटियाँ।


सती प्रथा से ना कोई महिला जले,

दहेज हत्या से अब लड रहीं बेटियाँ ।

अब नारी के खातिर खुला आसमान,

बन पायलट हवा में उड रहीं बेटियाँ।


अब डॉक्टर प्रोफेसर इंजीनियर बने,

दीप शिक्षा ले चल रहीं बेटियाँ।

तोड़ बेंडी गुलामी की आगे बढ़ीं,

सरहदो पर भी अब लड रहीं बेटियाँ।


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