STORYMIRROR

Deepak Kohli

Abstract

4  

Deepak Kohli

Abstract

बादल

बादल

1 min
216

बादल का एक टुकड़ा

आज आसमान में दिखाई दिया

उस बादल को देख 

पूरा गांव प्रसन्न हो उठा

दादी बोली अरे बेटा !


बनाओ पकौड़े और चाय

आ रही हमारी बारिश देवरानी

लाई होगी 

राहत चाचा को भी साथ

अब गर्मी मौसी 


जल्द जाएगी ससुराल

आखिर कैसी हो ग‌यी

यह गर्मी विकराल।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract