STORYMIRROR

ANIRUDH PRAKASH

Abstract

4  

ANIRUDH PRAKASH

Abstract

Ghazal

Ghazal

1 min
277

मुद्दतों बाद खुद से मुलाक़ात हुई और 

इसमें भी तेरी और सिर्फ तेरी बात हुई


उजाला रहा दिन भर तेरे इंतजार का

और फिर तन्हाइयों की रात हुई


साहिल प्यासा ही रहा समँदर के साथ चल के भी 

और समँदर में मुसलसल बरसात हुई


ज़ुस्तज़ू रही राह-ए-इश्क़ में तेरे साथ की 

बे-आरज़ू मगर साथ ग़मों की बारात हुई


अपने लिए थी जो चंद लम्हों की मुलाक़ात 

उनकी नज़रों में ये मेरे उम्र भर के इंतज़ार की मुसावात हुई


करने थे उनसे मिलकर उनकी जफ़ाओं के गिले हुई जो

मुलाक़ात तो उन्हें छोड़ उनसे जमाने भर की शिकायात हुई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract