STORYMIRROR

Rekha Mohan

Fantasy

3  

Rekha Mohan

Fantasy

कोई अपना हो या हो बेगाना

कोई अपना हो या हो बेगाना

1 min
142

कोई अपना हो या हो बेगाना

मुश्किलों में ही जाता पहचाना।

बदली राहें बदल गयी मंज़िल

इस नयी राह हुआ अंजाना।

लोग हमको यही बता देते

जीत जाने को सच्च न पैमाना।

सीख बेटी को माँ ने दी है यही

शाम ढलने से पहले घर आना।

जिसको हमने कभी नहीं देखा

वो खुदा कितना लगता पहचाना।

जब भी थक के मैं चूर होती हूँ

याद आता है माँ का सहलाना।

सब तू लबों पर हंसी लेकर आना

हम भी गम को बना लेंगे गाना।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy