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Jyotshna Rani Sahoo

Fantasy Inspirational

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Jyotshna Rani Sahoo

Fantasy Inspirational

गुनहगार

गुनहगार

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चारों तरफ़ बिरान है

खाली पन जिंदगी में

दुनियां की भीड़ में

पीछा करता अकेलापन है

वो कमज़ोर तो नहीं 

हौसला भी उछलता है

उमंग भी चीखता चिल्लाता है

पर ज़रूरत हल्ला बोल करता है

अफजाई होता है गरीबी का

दुःख की ताज पहनते गरीब


पेट में क्यूं भुक तमाशा करता है?

कोई बोलता यह एक आदत 

कोई बोला बनावट 

कोई बोला आहा रेे फूटी किस्मत

नियती को मंजूर कुछ और होता है

खुशियां मजबूरी में मजदूर बनते हैं।


हाए रे ये भूक़

हर बनावट को मंजूरी देती

उसके लिए रस्ता कुछ नहीं

बस एक ही

मुंह से लेकर पेट तक

लेश मात्र रह जाता एक राह

मुहाजिर बन जाते गुनाह के

गुनहगार बनते ईमानदार

ईमानदारी से करते गुनाह।


कोई इज्जत ढकने के लिए

दो हात की कपड़ा ढूंढते

कोई बचने के लिए ठंड से

जब पैर फैलाएं कम पड़े चादर

लपेट में लेते गुनाह के कम्बल

दो गज़ की जमीन ना मिले 

सच्चाई के मुहांजिरों को

बाद में गुनाह के सहर मिलते।


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