STORYMIRROR

Archana Tiwary

Abstract

3  

Archana Tiwary

Abstract

गुनगुनी धूप

गुनगुनी धूप

1 min
236

गुनगुनी धूप मन भावन लगने लगी 


धूप का टुकड़ा मायके की याद दिलाने लगा.....

सर्द की दुपहरी सुहानी लगने लगी

पंछियों की तान रस घोलने लगी..... 

मौसम का जादू है कुछ ऐसा   

दुल्हन बन आईने में खुद को निहारने लगी...


रुनझुन पायल की धुन छेड़ तराने पिया को बुलाने लगी..... 

बगिया के फूल भी झूम झूम गीत मिलन के गाने लगे....  

लिपट एक दूसरे संग मीठी लोरी सुनाने लगे.....

भौरें भी मदहोश हो हो आगोश में उनके जाने लगे....

गुनगुनी धूप मनभावन लगने लगी 

रह रह कर मायके की याद आने लगी.....


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract