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मिली साहा

Abstract Tragedy

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मिली साहा

Abstract Tragedy

गरीबों की बरसात की रात

गरीबों की बरसात की रात

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ना जाने कितने रंग लेकर, धरा पर आती है बरसात,

अमीरों के लिए है खुशी तो गरीबों पर है यह आघात,

अमीर पकोड़े की प्लेट सजा मौसम का लुत्फ उठाए,

गरीब के सर पर तो भारी पड़ती, हर बरसात की रात,


बादलों को फर्क ना पड़े, किसका भीग रहा आसमान,

गरीब के लिए आंसू बरसात, अमीरों के लिए मुस्कान,

महलों वाले कहां से समझ पाएंगे, उस तकलीफ को,

जो एक गरीब सहता, देख अपना ढहता हुआ मकान,


दो वक्त की रोटी मिल ना पाए वो छाता कहां से लाए,

अमीर चले कार में और ग़रीबों का अरमान भीग जाए,

जमें बारिश के पानी की छींटें, अमीर को करे परेशान,

सोचो गंदे पानी के ठहराव में, गरीब जीवन कैसे जीए,


रिमझिम बूंदों की आवाज़ अमीरों को लगती है तराना,

गरीबों की टपकती छत मुश्किल होता खुद को बचाना,

भीगो जाता चूल्हा गरीब का, बच्चों के रहते खाली पेट,

गरीबों के लिए तो अभिशाप, बरसात की रात का आना।


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