STORYMIRROR

Sudershan kumar sharma

Romance

4  

Sudershan kumar sharma

Romance

गजल

गजल

1 min
298

खूब सहे हैं गम दिल ने

मगर कभी गमों की नुमाइश नहीं की, 

मुस्कराते रहे हर पल हम

पर कभी मुस्कराहट कम 

नहीं की। 


वेरहमी से तोड़ते रहे जो अपने बन कर भी दिल हमारा

हमने कभी भी शिकायत नहीं की, सहते रहे हर चोट पत्थर

बन कर सुदर्शन, कभी टूटने पर भी गद्दारी नहीं की। 


सह लिया हर जख्म हंसी खुशी से, जख्म कितना गहरा

हो गया कभी व्यानबाजी नहीं

की, कर न सकी असर मरहम

कोई भी फिर भी बदलने की शिकायत न की। 


छोड़ रखी है डोर उसी मालिक पे सुदर्शन जिस ने

कभी किसी से गद्दारी नहीं की

गम जिसने दिए हैं वोही गम दूर करेगा कभी किसी इंसान

ने किसे पे इतनी मेहरबानी नहीं की। 


रख उम्मीद सदा उसी रब से

सुदर्शन जिस ने बांटते समय

 कभी बेईमानी नहीं की, रखता है एक जैसी नजर

सब पर वो पालनहारा, कभी

किसी को उस पर हैरानी नहीं हुई। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance