STORYMIRROR

गज़ल

गज़ल

1 min
938


क्यों खुशी में भी ग़म का साया है

हर घड़ी ग़म ही मुस्कराया है


कोई सुनता नहीं मेरी आहें

सर पटकना भी मेरा ज़ाया है


धड़कनें भी हुई है कब अपनी

यार दिलबर ने हक़ जमाया है


सुन के आवाज़ तेरी मैं आईं

क्यों लगे तू हुआ पराया है


इस जहां से लड़ी अकेली मैं

साथ तुमने कहां निभाया है


देख सांसें तुझे नहीं थमती

कैसे कह दूं कि दिल चुराया


क्यों लगाता है आग महफ़िल में

क्या कँवल ने तुझे बुलाया है



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Babita Agarwal Kanwal

Similar hindi poem from Romance