STORYMIRROR

Babita Agarwal Kanwal

Romance

2  

Babita Agarwal Kanwal

Romance

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
358


तू मुझे याद आये तो मैं क्या करूँ

याद तेरी रुलाये तो मैं क्या करूँ


चांदनी रात ने बादलों से कहा

चाँद गर रूठ जाए तो मैं क्या करूँ


पेड़ हमने लगाये बड़े शौक़ से

फल जो उनपे न आये तो मैं क्या करूँ


एक तरफ़ा मुहब्बत मुबारक़ तुझे

मुझको जब तू न भाये तो मैं क्या करूँ


ओट में रोज़ घूँघट के मनमोहनी

मुझको ठेंगा दिखाए तो मैं क्या करूँ


आज पहली मुलाक़ात ने ऐ कँवल

होश तेरे उड़ाए तो मैं क्या करूँ


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Babita Agarwal Kanwal

Similar hindi poem from Romance